हम अक्सर मिलते हैं अंधेरों में ,
और मैने जाना हैं की
तुम , हाँ हाँ , तुम ,
ज़ेहर खूबसूरत हो।
इंटेंस हो ,
बहुत कॉम्प्लेक्स हो ,
और तुम्हे बारीकी से सुलझाने का जी करता है।
तुम इस दुनिया से परे हो ,
हाँ ,मतलब, देखो न ,
तुम्हे छिपकलियां सुन्दर लगती हैं
और तुम समय को रोक देना चाहते हो ,
ये तुम्हारे शब्द ऐसे हैं जैसे कोहरे वाली ठण्ड में बर्फ ,
मैं सुन्न पड़ जाती हूँ,
तुम रंगीन हो , बहुत रंगीन ,
और मैं जानती हूँ तुम इस काली दुनिया को रंग दोगे...
अलग हो , बेख़ौफ़ हो ,
और मैने जाना हैं की
तुम , हाँ हाँ , तुम ,
ज़ेहर खूबसूरत हो।
इंटेंस हो ,
बहुत कॉम्प्लेक्स हो ,
और तुम्हे बारीकी से सुलझाने का जी करता है।
तुम इस दुनिया से परे हो ,
हाँ ,मतलब, देखो न ,
तुम्हे छिपकलियां सुन्दर लगती हैं
और तुम समय को रोक देना चाहते हो ,
मैं सुन्न पड़ जाती हूँ,
तुम रंगीन हो , बहुत रंगीन ,
और मैं जानती हूँ तुम इस काली दुनिया को रंग दोगे...
अलग हो , बेख़ौफ़ हो ,