Sunday, 29 March 2015

You, Only you.

पता है, जबसे तुमसे मिली हूँ ,
आसमान ज़्यादा सुन्दर लगने लगा हैं ,
हर शाम सात बजे चाँद और तारें देखना इकलौता काम हो जैसे

और बालकनी की नाली से निकलते बरसाती बिच्छू भी मेरे दोस्त हो गये हैं ,
उन्हें तुम्हारी कविताएँ पसंद हैं ,

यह जो तुम खूबसूरत तस्वीरें खीचते हो न,
जादू हैं इनमें ,
दोपहर इनको निहारते हुए इतनी जल्दी क्यों गुज़र जाती हैं ?

मैं  तुम्हारे बारे में बहुत सोचती हूँ ,  और सोचती चली जाती हूँ,
तुम साथ होते तो कैसा होता?


And  , 
Oh Darling , I'll shine out of your darkness.
For I believe that its just a phase and it'll pass.

Don't you know that I look up to Virginia Woolf ? I dont buy your contraints.

I know I am golden .


Wednesday, 25 March 2015

चलो ,अब लौट आओ

सुनो ,
उस रात  तुमने मुझे जहां जहां  चूमा था
वहाँ गहरे घांव उभर आये हैं ,
और मलहम , मेरी बात मानो , सिर्फ तुम हो। 

वो काली रात आज चक्री की तरह ज़हन में घूम  रही है ,
और याद आरही है वो सड़क जहाँ तुमने मुझे अपना मनपसंद पेड़ दिखाया था।

ज़रा आकर मेरे दिल की सड़क पर देखो  ,
आज वही पेड़ मैं तुम्हारे लिए उतार लायी हूँ।





Saturday, 21 March 2015

15-01-2015

तेरे खतों के सहारे ही सही
ज़िंदा हूँ ,
मक़बरा नहीं हुई हूँ

हाँ, तेरी तसवीरें देख सिहर उठती हूँ,
तेरी  मौजूदगी  के लिए तरसती हूँ
पर अभी ज़िंदा हूँ'

भीड़ में तेरे इत्र की खुशबू संग बहती चली जाती हूँ ..
तेरी यादों के भवंडर में गुम जाने को।

तेरे कुर्ते से लिपट , बेजान ,
तेरे चेहरे को इस कमरे के खालीपन में तराशती हूँ ,
तेरी खुशबू को सहेजने की नाकाम  कोशिश  करती हूँ ,
 एक बार फिर मर  जाने को।

तेरी मोहब्बत के लिए झटपटाती  हूँ
पर अभी ज़िंदा हूँ ,
मक़बरा नहीं हुई हूँ ...  

Unspoken

शौहर के नाम से मुझे खौफ आता है ,
बच्चे  ज़िम्मेदारी लगते हैं जो मैं उठाना नहीं चाहती ,
गाडी बंगला  मुझे  लुभाते नहीं ,
दुनियादारी कुछ ख़ास समझ आती नहीं

बस खुली राहों पर नंगे पाँव चलने को  जी करता है
बेपरवाह , बेबाक सा

एक ऐसे पते की तलाश में ,
जहां कला को मिले पनाह और जूनून की हो फ़तेह.......