Wednesday, 25 March 2015

चलो ,अब लौट आओ

सुनो ,
उस रात  तुमने मुझे जहां जहां  चूमा था
वहाँ गहरे घांव उभर आये हैं ,
और मलहम , मेरी बात मानो , सिर्फ तुम हो। 

वो काली रात आज चक्री की तरह ज़हन में घूम  रही है ,
और याद आरही है वो सड़क जहाँ तुमने मुझे अपना मनपसंद पेड़ दिखाया था।

ज़रा आकर मेरे दिल की सड़क पर देखो  ,
आज वही पेड़ मैं तुम्हारे लिए उतार लायी हूँ।





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