सुनो ,
उस रात तुमने मुझे जहां जहां चूमा था
वहाँ गहरे घांव उभर आये हैं ,
और मलहम , मेरी बात मानो , सिर्फ तुम हो।
वो काली रात आज चक्री की तरह ज़हन में घूम रही है ,
और याद आरही है वो सड़क जहाँ तुमने मुझे अपना मनपसंद पेड़ दिखाया था।
ज़रा आकर मेरे दिल की सड़क पर देखो ,
आज वही पेड़ मैं तुम्हारे लिए उतार लायी हूँ।
उस रात तुमने मुझे जहां जहां चूमा था
वहाँ गहरे घांव उभर आये हैं ,
और मलहम , मेरी बात मानो , सिर्फ तुम हो।
वो काली रात आज चक्री की तरह ज़हन में घूम रही है ,
और याद आरही है वो सड़क जहाँ तुमने मुझे अपना मनपसंद पेड़ दिखाया था।
ज़रा आकर मेरे दिल की सड़क पर देखो ,
आज वही पेड़ मैं तुम्हारे लिए उतार लायी हूँ।
Sahi hai janab
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