पता है, जबसे तुमसे मिली हूँ ,
आसमान ज़्यादा सुन्दर लगने लगा हैं ,
हर शाम सात बजे चाँद और तारें देखना इकलौता काम हो जैसे
और बालकनी की नाली से निकलते बरसाती बिच्छू भी मेरे दोस्त हो गये हैं ,
उन्हें तुम्हारी कविताएँ पसंद हैं ,
यह जो तुम खूबसूरत तस्वीरें खीचते हो न,
जादू हैं इनमें ,
दोपहर इनको निहारते हुए इतनी जल्दी क्यों गुज़र जाती हैं ?
मैं तुम्हारे बारे में बहुत सोचती हूँ , और सोचती चली जाती हूँ,
तुम साथ होते तो कैसा होता?
आसमान ज़्यादा सुन्दर लगने लगा हैं ,
हर शाम सात बजे चाँद और तारें देखना इकलौता काम हो जैसे
और बालकनी की नाली से निकलते बरसाती बिच्छू भी मेरे दोस्त हो गये हैं ,
उन्हें तुम्हारी कविताएँ पसंद हैं ,
यह जो तुम खूबसूरत तस्वीरें खीचते हो न,
जादू हैं इनमें ,
दोपहर इनको निहारते हुए इतनी जल्दी क्यों गुज़र जाती हैं ?
मैं तुम्हारे बारे में बहुत सोचती हूँ , और सोचती चली जाती हूँ,
तुम साथ होते तो कैसा होता?
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