Sunday, 29 March 2015

You, Only you.

पता है, जबसे तुमसे मिली हूँ ,
आसमान ज़्यादा सुन्दर लगने लगा हैं ,
हर शाम सात बजे चाँद और तारें देखना इकलौता काम हो जैसे

और बालकनी की नाली से निकलते बरसाती बिच्छू भी मेरे दोस्त हो गये हैं ,
उन्हें तुम्हारी कविताएँ पसंद हैं ,

यह जो तुम खूबसूरत तस्वीरें खीचते हो न,
जादू हैं इनमें ,
दोपहर इनको निहारते हुए इतनी जल्दी क्यों गुज़र जाती हैं ?

मैं  तुम्हारे बारे में बहुत सोचती हूँ ,  और सोचती चली जाती हूँ,
तुम साथ होते तो कैसा होता?


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