Thursday, 2 July 2015

उसे नदी होना था

वो लड़की अक्सर हर छोटी छोटी बात का तर्क ढूंढती ,
चलती हवा में बहती पुरानी खुशबू का , टूटे पत्तों की आहट में छिपी उदासी का और
 नींद से  अचानक उठकर  समय को रोक ने की नयी नयी तरकीबें सोचती ,
अब वो पहले जैसी नहीं रही थी
उसे शेहेर का दौड़ता समय काटने लगा  था,
 इंतज़ार ऐसा था जैसे मौत , हर नब्बे सेकंड की  रेड लाइट पे वह थोड़ा मर जाती ,
और भीड़  देख उसके  हाथ पाओ फूलने लगते ,
उसे लोगों से  और उनके इरादों से डर लगने लगा था ,और
डर लगने लगा था खुदसे और खुद की अवास्तविक दुनिया से ,
उसे लगने लगा जैसे वो खुद को खोती  जा रही है.
वो घंटो तारों से बातें करती ,
लापता लोगों के निशाँ तलाशती
बेनाम कवियों  की कविताएं सहेजती ,
चिठियां लिखती , खूब सारी चिठियां , खाली अस्तित्वहीन  पते पर ,
नहीं , वो  पागल नहीं थी ,
वो बस अब पहले जैसी नहीं रही थी
दुनियादारी से कोसो दूर , वह अपना एक ठिकाना ढूंढ रही थी
कहीं दूर, बहुत दूर , जहां मिलते हो पीले पत्ते , उदास  लटकते  लैटरबॉक्स , सुखद प्याऊ , रंग बिरंगी घर ,भटकते बंजारे और जहां कभी ना होती हो रात।

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Friday, 3 April 2015

Only You

हम अक्सर  मिलते हैं अंधेरों में ,
और मैने जाना हैं की
तुम , हाँ हाँ , तुम ,
ज़ेहर खूबसूरत हो। 

इंटेंस हो ,
बहुत कॉम्प्लेक्स हो ,
और तुम्हे बारीकी से सुलझाने का जी करता है। 

तुम इस दुनिया से परे  हो ,
हाँ ,मतलब, देखो न ,
तुम्हे छिपकलियां सुन्दर लगती हैं
और तुम समय को रोक देना चाहते हो ,

ये तुम्हारे शब्द ऐसे हैं जैसे कोहरे वाली ठण्ड में बर्फ ,
मैं सुन्न पड़  जाती हूँ,
तुम  रंगीन हो , बहुत रंगीन ,
और  मैं  जानती हूँ  तुम इस काली दुनिया को रंग दोगे...

अलग हो , बेख़ौफ़ हो , 



Sunday, 29 March 2015

You, Only you.

पता है, जबसे तुमसे मिली हूँ ,
आसमान ज़्यादा सुन्दर लगने लगा हैं ,
हर शाम सात बजे चाँद और तारें देखना इकलौता काम हो जैसे

और बालकनी की नाली से निकलते बरसाती बिच्छू भी मेरे दोस्त हो गये हैं ,
उन्हें तुम्हारी कविताएँ पसंद हैं ,

यह जो तुम खूबसूरत तस्वीरें खीचते हो न,
जादू हैं इनमें ,
दोपहर इनको निहारते हुए इतनी जल्दी क्यों गुज़र जाती हैं ?

मैं  तुम्हारे बारे में बहुत सोचती हूँ ,  और सोचती चली जाती हूँ,
तुम साथ होते तो कैसा होता?


And  , 
Oh Darling , I'll shine out of your darkness.
For I believe that its just a phase and it'll pass.

Don't you know that I look up to Virginia Woolf ? I dont buy your contraints.

I know I am golden .


Wednesday, 25 March 2015

चलो ,अब लौट आओ

सुनो ,
उस रात  तुमने मुझे जहां जहां  चूमा था
वहाँ गहरे घांव उभर आये हैं ,
और मलहम , मेरी बात मानो , सिर्फ तुम हो। 

वो काली रात आज चक्री की तरह ज़हन में घूम  रही है ,
और याद आरही है वो सड़क जहाँ तुमने मुझे अपना मनपसंद पेड़ दिखाया था।

ज़रा आकर मेरे दिल की सड़क पर देखो  ,
आज वही पेड़ मैं तुम्हारे लिए उतार लायी हूँ।





Saturday, 21 March 2015

15-01-2015

तेरे खतों के सहारे ही सही
ज़िंदा हूँ ,
मक़बरा नहीं हुई हूँ

हाँ, तेरी तसवीरें देख सिहर उठती हूँ,
तेरी  मौजूदगी  के लिए तरसती हूँ
पर अभी ज़िंदा हूँ'

भीड़ में तेरे इत्र की खुशबू संग बहती चली जाती हूँ ..
तेरी यादों के भवंडर में गुम जाने को।

तेरे कुर्ते से लिपट , बेजान ,
तेरे चेहरे को इस कमरे के खालीपन में तराशती हूँ ,
तेरी खुशबू को सहेजने की नाकाम  कोशिश  करती हूँ ,
 एक बार फिर मर  जाने को।

तेरी मोहब्बत के लिए झटपटाती  हूँ
पर अभी ज़िंदा हूँ ,
मक़बरा नहीं हुई हूँ ...  

Unspoken

शौहर के नाम से मुझे खौफ आता है ,
बच्चे  ज़िम्मेदारी लगते हैं जो मैं उठाना नहीं चाहती ,
गाडी बंगला  मुझे  लुभाते नहीं ,
दुनियादारी कुछ ख़ास समझ आती नहीं

बस खुली राहों पर नंगे पाँव चलने को  जी करता है
बेपरवाह , बेबाक सा

एक ऐसे पते की तलाश में ,
जहां कला को मिले पनाह और जूनून की हो फ़तेह.......




Thursday, 1 January 2015

हब्स

मेरे कमरे का मंज़र कुछ यूँ है ,
कि बहरी हो गई हैं दीवारें,
सुन मेरी चीखें , लाचार पुकारें |

मानों , दरवाज़ा ज़ंग खा गया है ,
मेरे लगातार बेबस खटखटाने से |

धूल से ढका यह आइना,
भयानक सच दिखाने से कतराने लगा है| 

मेरी धँसी आँखों में दफ़्न आँसू देख ,
घड़ी के कांटें सुन्न पड़ गए हैं | 

सामने दीवार पर टंगे गाँधी , 
मेरे सिगरेट से सुलगाए बदन को निहारते हैं , 
एकटक , निःशब्द | 

टूटा बल्ब जैसे कोई इनायत हो , 
मेरे जख्मी पिंजर पर |

सोचती हूँ,हैवान उजाले से तो खाली अंधेरा ही अपना है|